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गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में उड़द दाल खाने के फायदे व रेसिपी | Urad Dal During Pregnancy In Hindi
IN THIS ARTICLE
कà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उड़द की दाल खाना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
उड़द दाल के पोषक ततà¥à¤¤à¥à¤µ
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उड़द दाल खाने के फायदे | pregnancy me urad dal ke fayde
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान काली उड़द का सेवन करते समय बरती जाने वाली सावधानियां
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में खाने के लिठकाली उड़द दाल से बनी लडà¥à¤¡à¥‚ की रेसिपी
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में कब कà¥à¤¯à¤¾ खाने का मूड कर जाà¤, यह बता पाना असंà¤à¤µ है। इस समय कई बार महिलाओं को पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के लिठसही न माने जाने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ खाने का मन करने लगता है। इसी वजह महिलाओं को इस नाजà¥à¤• दौर में सतरà¥à¤• और जागरूक रहने की सलाह दी जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में काली उड़द दाल गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में खाना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है या नहीं, यह सवाल मन में आ रहा है, तो मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ का यह लेख पढ़ें। यहां पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में काली उड़द दाल के सेवन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जानकारी दी गई है। साथ ही गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में उड़द दाल खाने के फायदे और सावधानियां à¤à¥€ बताई गई हैं।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में काली उड़द का सेवन सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है या नहीं, सबसे पहले यह जानिà¤à¥¤
कà¥à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उड़द की दाल खाना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
हां, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में उड़द दाल खाना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है। इसका सेवन न सिरà¥à¤« नाशà¥à¤¤à¥‡ में, बलà¥à¤•ि दोपहर और रात के à¤à¥‹à¤œà¤¨ में à¤à¥€ किया जा सकता है। बस धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को आहार में दिन à¤à¤° में दो से ढाई कप दाल ही लेनी चाहिà¤à¥¤ इसमें उड़द दाल की मातà¥à¤°à¤¾ को करीब à¤à¤• कप यानी 30 गà¥à¤°à¤¾à¤® तक ही सीमित रखें (1)।
इसके अलावा, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में उड़द दाल में मौजूद आयरन को à¤à¥€ फायदेमंद माना जाता है। इस बात का जिकà¥à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जारी गाइडलाइन ‘गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ से बचाव’ में à¤à¥€ मिलता है। इसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में खून की कमी से बचने के लिठआयरन व फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ (IFA) से समृदà¥à¤§ काली उड़द दाल का सेवन अचà¥à¤›à¤¾ होता है। साथ ही गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ समृदà¥à¤§ खादà¥à¤¯ खाने की à¤à¥€ सलाह दी जाती है, जिसमें उड़द दाल à¤à¥€ शामिल है (2)।
आगे आप काली उड़द दाल में पाठजाने वाले पोषक ततà¥à¤µ व उनकी मातà¥à¤°à¤¾ के बारे में पढ़ेंगे।
उड़द दाल के पोषक ततà¥à¤¤à¥à¤µ
यहां हम पà¥à¤°à¤¤à¤¿ 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® काली उड़द दाल में मौजूद पोषक ततà¥à¤µ व उनकी मातà¥à¤°à¤¾ बता रहे हैं, जो कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (3)।
पà¥à¤°à¤¤à¤¿ 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® काली उड़द दाल में 350 केसीà¤à¤à¤² ऊरà¥à¤œà¤¾, 24 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, 1.5 गà¥à¤°à¤¾à¤® टोटल लिपिड (फैट), 60 गà¥à¤°à¤¾à¤® कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ, 3 गà¥à¤°à¤¾à¤® शà¥à¤—र और 29 गà¥à¤°à¤¾à¤® फाइबर (टोटल डाइटरी) होता है।
मिनरलà¥à¤¸ की बात करें, तो 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® काली उड़द दाल में 200 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, 7.2 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® आयरन और 40 मिलीगà¥à¤°à¤¾à¤® सोडियम होता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में काली उड़द दाल खाने के फायदे, जानने के लिठआगे सà¥à¤•à¥à¤°à¥‰à¤² करें।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उड़द दाल खाने के फायदे | pregnancy me urad dal ke fayde
उड़द दाल को पावर फूड कैटेगरी में रखा जाता है। इसी वजह से गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में उड़द दाल खाने के फायदे निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हो सकते हैं।
1. à¤à¥à¤°à¥‚ण के बेहतर विकास के लिठ– गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान à¤à¥à¤°à¥‚ण के बेहतर विकास के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ को आवशà¥à¤¯à¤• माना जाता है (4)। उड़द की दाल à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का à¤à¤• उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है (3)। इसकी पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ परिवार कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯, à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जारी à¤à¤• गाइडलाइन से à¤à¥€ होती है। इसमें बताया गया है कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ से समृदà¥à¤§ काली उड़द दाल का सेवन किया जाना चाहिठ(2)। à¤à¤¸à¥‡ में सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के लिठआहार में उड़द की दाल को शामिल करना à¤à¤• अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª माना जा सकता है।
2. पाचन के लिठ– गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के समय कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ होना बेहद आम है (5)। यही वजह है कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में फाइबर यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करने की सलाह दी जाती है। à¤à¤• शोध में साफ तौर पर बताया गया है कि उड़द दाल में घà¥à¤²à¤¨à¤¶à¥€à¤² और अघà¥à¤²à¤¨à¤¶à¥€à¤² दोनों तरह के फाइबर होते हैं, जो पाचन को दà¥à¤°à¥à¤¸à¥à¤¤ रखने में सहायक हो सकते हैं (6)।
3. कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की पूरà¥à¤¤à¤¿ के लिठ– à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेकà¥à¤¨à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¥€ इंफॉरà¥à¤®à¥‡à¤¶à¤¨) पर उपलबà¥à¤§ à¤à¤• शोध के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, गरà¥à¤à¤µà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ शिशà¥, दोनों को कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ से नवजात को लो बरà¥à¤¥ वेट की परेशानी से बचाया जा सकता है। यही वजह है कि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को दूसरी और तीसरी तिमाही में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾-से-जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार लेने के लिठकहा जाता है (7)। à¤à¤¸à¥‡ आहार की लिसà¥à¤Ÿ में उड़द की दाल का नाम à¤à¥€ शामिल है (3)।
इसके अलावा, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की उचित मातà¥à¤°à¤¾ बनाठरखने से कमजोर हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के जोखिम से à¤à¥€ बचाव होता है। साथ ही हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° की गंà¤à¥€à¤° सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¥€ पà¥à¤°à¥€-à¤à¤•à¥à¤²à¥‡à¤®à¤ªà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ व समय पूरà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के जोखिम को à¤à¥€ दूर करने में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® को लाà¤à¤•ारी माना जाता है (8)।
4. à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ से बचाव – गरà¥à¤à¤µà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अपने और गरà¥à¤ में पल रहे बचà¥à¤šà¥‡ दोनों के लिठआयरन की उचित खà¥à¤°à¤¾à¤• की जरूरत होती है। इसकी कमी होते ही à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ होने की आशंका बढ़ने लगती है (9)। साथ ही आयरन को à¤à¥à¤°à¥‚ण के मानसिक और शारीरिक विकास के लिठà¤à¥€ जरूरी माना जाता है (10)। à¤à¤¸à¥‡ में उड़द दाल का सेवन गà¥à¤£à¤•ारी साबित हो सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसमें आयरन परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ होती है (2)।
5. शरीर को ऊरà¥à¤œà¤¾à¤µà¤¾à¤¨ बनाठ– गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में शिशॠकी गà¥à¤°à¥‹à¤¥ और मां के सà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ के उतà¥à¤¤à¤•ों, गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ व पà¥à¤²à¥‡à¤‚सेंटा के उतà¥à¤¤à¤•ों के विकास के लिठशरीर में ऊरà¥à¤œà¤¾ होना जरूरी है (11)। इसे बनाठरखने के लिठउड़द दाल का सेवन किया जा सकता है। दरअसल, शरीर को ऊरà¥à¤œà¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने में कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ, लिपिड व पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की अहम à¤à¥‚मिका होती है (12)।
ये सà¤à¥€ ततà¥à¤µ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ रासायनों को तोड़कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कोशिकाओं तक पहà¥à¤‚चाते हैं। इससे शरीर को ऊरà¥à¤œà¤¾ मिलती रहती है (12)। हम पहले ही बता चà¥à¤•े हैं कि उड़द दाल पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, लिपिड और कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ से समृदà¥à¤§ होती है (3)। à¤à¤¸à¥‡ में कहा जा सकता है कि शारीरिक ऊरà¥à¤œà¤¾ को बनाठरखने के लिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ के लिठउड़द दाल का सेवन लाà¤à¤•ारी होता है।
6. दरà¥à¤¦ से राहत दिलाना – गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान महिला के शरीर में आठबदलावों की वजह से जोड़ों और मांसपेशियों में दरà¥à¤¦ बढ़ सकता है (13)। वहीं, उड़द दाल में à¤à¤¨à¤¾à¤²à¥à¤œà¥‡à¤¸à¤¿à¤• यानी दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤¶à¤• और सूजन को कम करने वाले गà¥à¤£ मौजूद होते हैं। ये दोनों पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान होने वाले शरीरिक दरà¥à¤¦ और सूजन से छà¥à¤Ÿà¤•ारा दिलाने में सहायक हो सकते हैं (14)।
7. सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वजन के लिठ– गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान महिला का सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ शारीरिक वजन होना आवशà¥à¤¯à¤• है। अगर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ का वजन बहà¥à¤¤ कम होगा, तो समय से पहले शिशॠके जनà¥à¤® व जनà¥à¤® के दौरान शिशॠका वजन कम होने का जोखिम बढ़ जाता है। इससे बढ़ती उमà¥à¤° में शिशॠका विकास धीमा à¤à¥€ हो सकता है (15)।
à¤à¤¸à¥‡ में सही वजन बनाठरखने के लिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को आहार में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरह की दालों को शामिल करने की सलाह दी जाती है (1)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि उड़द दाल का सेवन करने से à¤à¥€ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ वजन बनाठरखने में मदद मिलेगी।
8. पोषण से à¤à¤°à¤ªà¥‚र – सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के लिठआहार में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, विटामिन, मिनरल, फैट के साथ ही अनà¥à¤¯ जरूरी पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ को à¤à¥€ शामिल करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है (10)। इन जरूरी पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के लिठकाली उड़द दाल का सेवन किया जा सकता है। जी हां, उड़द दाल पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ व फाइबर के साथ ही जिंक, आयरन व मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® जैसे मिनरलà¥à¤¸ व विटामिनà¥à¤¸ से समृदà¥à¤§ होती है (16)।
आगे समà¤à¤¿à¤ कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में काली उड़द का सेवन करते समय किन-किन बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤à¥¤
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान काली उड़द का सेवन करते समय बरती जाने वाली सावधानियां
महिलाओं को अगर पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में उड़द दाल खाने का मन है, तो आसानी से इसका सेवन कर सकती हैं। बस इसके सेवन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ कà¥à¤› जरूरी सावधानियों पर गौर करना न à¤à¥‚लें।
अचà¥à¤›à¥€ तरह धोने के बाद ही उड़द की दाल को पकाà¤à¤‚। धोने से इसमें मौजूद कीटाणॠऔर घà¥à¤¨ जैसे राशन वाले कीड़े बाहर निकल जाà¤à¤‚गे।
हमेशा अचà¥à¤›à¥€ तरह से गली और पकी हà¥à¤ˆ उड़द दाल का ही सेवन करें।
घर के बजाय अगर किसी रेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤‚ट में उड़द की दाल खा रही हैं, तो खाने से पहले सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें कि उसमें जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मसाले न हों।
पकी हà¥à¤ˆ उड़द दाल को ताजा ही खाà¤à¤‚। बासी दाल का सेवन करने से बचें।
हमेशा बिना पॉलिश की हà¥à¤ˆ दाल ही पकाने के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में लाà¤à¤‚।
आधे या à¤à¤• कप से अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में काली उड़द दाल का सेवन न करें (1)। दरअसल, यह फाइबर से समृदà¥à¤§ होती है। इसका अधिक सेवन करने से पेट फूलने, गैस बनने व पेट में à¤à¤‚ठन की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है (17)।
आहार में अनà¥à¤¯ दाल को à¤à¥€ शामिल कर रही हैं, तो उड़द दाल की मातà¥à¤°à¤¾ को कम कर दें।
काली उड़द दाल देरी से पचती है, इस वजह से यह पाचन से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ कर सकती है (18)। à¤à¤¸à¥‡ में अगर महिला को अपच या à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ है, तो गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान उड़द दाल का सेवन करने से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह जरूर लें।
दो टà¥à¤•ड़ों में टूटी हà¥à¤ˆ उड़द दाल ही खरीदें, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि साबूत उड़द दाल को पकने में अधिक समय लगता है। इस वजह से कई बार ये अधपके à¤à¥€ रह जाते हैं।
अगर उड़द दाल में घà¥à¤¨ बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो गठहैं और नीचे की दाल पाउडर जैसी हो गई है, तो उसे बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² में न लाà¤à¤‚।
लेख के आखिरी हिसà¥à¤¸à¥‡ में जरूर पढ़ें पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में काली उड़द दाल के लडà¥à¤¡à¥‚ की रेसिपी।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में खाने के लिठकाली उड़द दाल से बनी लडà¥à¤¡à¥‚ की रेसिपी
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में काली उड़द दाल खाने के फायदे हैं, यह हम आपको बता ही चà¥à¤•े हैं। अब पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में काली उड़द का सेवन कैसे करें, सोच रही हैं, तो उड़द दाल से बने लडà¥à¤¡à¥‚ खा सकती हैं। पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में काली उड़द दाल के लडà¥à¤¡à¥‚ की रेसिपी आगे जानिà¤à¥¤
सामगà¥à¤°à¥€ :
1 कप काली उड़द दाल
1 कप चीनी
आधा कप घी
4 से 5 à¤à¥‚ने हà¥à¤ व बारीक कटे हà¥à¤ काजू
बनाने की विधि :
à¤à¤• पैन को गरà¥à¤® करके उसमें काली उड़द दाल को अचà¥à¤›à¥€ तरह से à¤à¥‚न लें।
अब कà¥à¤› देर दाल को ठंडा होने दें और फिर बà¥à¤²à¥‡à¤‚डर में डालकर पीसे लें।
पीसने के बाद à¤à¤• कोटरी में काली उड़द दाल का पाउडर निकाल लें।
फिर उसमें काजू, चीनी और पिघला हà¥à¤† घी डालकर अचà¥à¤›à¥‡ से मिलाà¤à¤‚।
मिलाने के बाद इसके गोल आकार के छोटे-छोटे लडà¥à¤¡à¥‚ बना लें।
अब इन लडà¥à¤¡à¥‚ को à¤à¤• à¤à¤¯à¤° टाइट जार में डालकर रख दें।
दोपहर में à¤à¥‹à¤œà¤¨ के बाद काली उड़द दाल से बने लडà¥à¤¡à¥‚ का सेवन करें।
दिन में मीठा खाने की कà¥à¤°à¥‡à¤µà¤¿à¤‚ग होने पर à¤à¥€ काली उदड़ दाल से बनाठगठलडà¥à¤¡à¥‚ खा सकते हैं
अब आप गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में उड़द दाल खाने के फायदे समठही गठहोंगे। à¤à¤¸à¥‡ में पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में काली उड़द का सेवन कैसे करें, यह सवाल मन में आठतो à¤à¤Ÿ से लेख में दी गई उड़द दाल के लडà¥à¤¡à¥‚ की रेसिपी पढ़कर इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बना लें। इसके अलावा, पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में काली उड़द दाल का पानी à¤à¥€ पी सकती हैं। बस धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि इसका सेवन सीमित मातà¥à¤°à¤¾ में ही करना है।
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